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अमृत सरोवर में अनियमितता पर डीएम का कड़ा एक्शन, तीन ईओ समेत पांच पर कार्रवाई की संस्तुति

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रविन्द्र कुमार

सिसवा बाजार,महराजगंज l नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के मीरा बाई नगर वार्ड संख्या-25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण, वित्तीय अनियमितता और पर्यवेक्षण में लापरवाही के मामले में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने इस संबंध में प्रमुख सचिव, नगर विकास को पत्र भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की है।

मामले में 18 जुलाई 2026 को प्राप्त शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में उप जिलाधिकारी निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग महराजगंज तथा उपायुक्त श्रम रोजगार महराजगंज को शामिल किया गया था। समिति को अमृत सरोवर परियोजना में लगाए गए भ्रष्टाचार, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

जांच के दौरान सरोवर में डूबने से तीन बच्चों की हुई मौत की घटना को भी गंभीरता से संज्ञान में लिया गया। जिलाधिकारी ने समिति को यह जांचने के निर्देश दिए कि निर्माण कार्य एवं उसके पर्यवेक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन किया था या नहीं। इस घटना के तत्काल बाद संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेजने की कार्रवाई भी की गई थी।

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान अधिशासी अधिकारी विन्ध्याचल को स्पष्टीकरण जारी किया जा चुका है। साथ ही अमृत 2.0 योजना के तहत स्वीकृत तालाब सौंदर्यीकरण के वास्तविक निर्माण कार्य के दौरान तैनात रहे अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका और उनके पर्यवेक्षणीय दायित्वों की भी जांच की गई।

रिपोर्ट में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत सिसवा बाजार संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार तथा लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा से स्पष्टीकरण प्राप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। जिलाधिकारी ने संबंधित प्रकरण में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने स्पष्ट किया कि सरकारी धन से संचालित विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण अथवा पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई होगी।

उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन में भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति प्रभावी है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई तय है और किसी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

 

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